UN में फिर दोहराया अपना दावा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार, 22 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में भारत-पाकिस्तान संघर्ष को लेकर अपने पुराने दावे को फिर दोहराया।

ट्रंप ने कहा कि उनके कार्यकाल में उन्होंने कई संघर्षों को खत्म कराने में भूमिका निभाई, जिनमें भारत-पाकिस्तान संघर्ष भी शामिल है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने उन्हें इस संघर्ष को रोकने और 30 मिलियन यानी करीब 3 करोड़ लोगों की जान बचाने का श्रेय दिया।


ट्रंप ने क्या कहा?

UNGA में अपने भाषण के दौरान ट्रंप ने शहबाज शरीफ को “बहुत अच्छे व्यक्ति” के तौर पर संबोधित करते हुए कहा कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने उन्हें बताया कि वह 3 करोड़ और संभवतः उससे भी अधिक लोगों की जान बचाने के लिए जिम्मेदार थे।

ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान को उन संघर्षों की सूची में शामिल किया, जिन्हें उनके अनुसार उन्होंने अपने कूटनीतिक प्रयासों से सुलझाने में मदद की।

उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित देशों के नेताओं ने उनके प्रयासों के लिए उन्हें पत्र लिखकर धन्यवाद दिया।


मई 2025 में क्या हुआ था?

अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव तेजी से बढ़ा। इसके बाद दोनों देशों के बीच कई दिनों तक मिसाइल, ड्रोन और सैन्य हमले हुए।

10 मई 2025 को दोनों देशों ने सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति जताई।

ट्रंप ने उस समय दावा किया था कि अमेरिका की मध्यस्थता और व्यापारिक दबाव के कारण दोनों देशों के बीच संघर्ष रुका। इसके बाद से वह कई बार इस दावे को दोहरा चुके हैं।


भारत का क्या कहना है?

भारत ने ट्रंप के इस दावे को स्वीकार नहीं किया है।

भारत का आधिकारिक रुख रहा है कि सैन्य कार्रवाई रोकने की बातचीत भारत और पाकिस्तान के सैन्य अधिकारियों के बीच सीधे हुई थी। भारतीय अधिकारियों ने अमेरिकी मध्यस्थता को इसका आधार नहीं माना।

विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने मई 2025 में कहा था कि सैन्य कार्रवाई रोकने को लेकर बातचीत दोनों देशों के Director General of Military Operations (DGMO) के बीच स्थापित सैन्य चैनल के माध्यम से हुई थी।

बाद में भारतीय नेताओं ने भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता के दावे को खारिज किया।


पाकिस्तान का रुख अलग रहा है

दूसरी तरफ पाकिस्तान ने ट्रंप की भूमिका को अधिक सकारात्मक तरीके से प्रस्तुत किया है। पाकिस्तान ने 2025 में ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित करने की घोषणा करते हुए भारत-पाकिस्तान संकट के दौरान उनकी कूटनीतिक भूमिका की प्रशंसा की थी।

इसी संदर्भ में ट्रंप ने UNGA में शहबाज शरीफ के कथित धन्यवाद का उल्लेख किया।


क्या 3 करोड़ लोगों की जान सच में बची?

यहां सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि 3 करोड़ का आंकड़ा कोई स्वतंत्र रूप से सत्यापित अनुमान नहीं है।

ट्रंप ने इसे शहबाज शरीफ द्वारा कही गई बात के रूप में पेश किया। UN भाषण में उन्होंने इसके समर्थन में कोई स्वतंत्र गणना या विश्लेषण प्रस्तुत नहीं किया। इसलिए इसे खबर में “ट्रंप का दावा” लिखना ही तथ्यात्मक रूप से उचित है।

ट्रंप पहले भी भारत-पाकिस्तान संघर्ष के संदर्भ में लाखों लोगों की जान बचाने की अलग-अलग संख्या का उल्लेख कर चुके हैं।


भारत-पाकिस्तान संघर्ष कितना गंभीर था?

2025 में दोनों परमाणु-सशस्त्र देशों के बीच कई दिनों तक सैन्य टकराव हुआ था। भारत ने इसे पहलगाम आतंकी हमले के बाद शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर से जोड़ा था।

दोनों देशों के बीच संघर्ष बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ी थी। 10 मई को सैन्य कार्रवाई रोकने की घोषणा के बाद तत्काल सैन्य तनाव कम हुआ।

हालांकि, यह कहना कि अगर संघर्ष नहीं रुकता तो निश्चित रूप से 3 करोड़ लोग मारे जाते, उपलब्ध तथ्यों से साबित नहीं होता।


ट्रंप के दावे और भारत के रुख में अंतर

मुद्दाट्रंप का दावाभारत का रुख
संघर्ष रोकने में भूमिकाअमेरिका ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाईसीधी भारत-पाक सैन्य बातचीत से समझ बनी
मध्यस्थताअमेरिकी हस्तक्षेप/दबाव का दावातीसरे पक्ष की मध्यस्थता से इनकार
3 करोड़ जानेंशहबाज के हवाले से दावाऐसा कोई आधिकारिक भारतीय अनुमान नहीं
युद्ध रुकने का माध्यमअमेरिकी प्रयास और दबावDGMO स्तर की सीधी बातचीत


निष्कर्ष

UN महासभा में डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत-पाकिस्तान संघर्ष को रोकने में अपनी भूमिका का दावा किया और कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने उन्हें 3 करोड़ लोगों की जान बचाने का श्रेय दिया।

हालांकि, इस दावे को स्वतंत्र रूप से सत्यापित आंकड़े के रूप में पेश नहीं किया जा सकता। भारत का आधिकारिक रुख इससे अलग है और वह कहता रहा है कि मई 2025 में सैन्य कार्रवाई रोकने की समझ भारत और पाकिस्तान के बीच सीधे सैन्य संवाद से बनी थी।

इसलिए इस खबर का सबसे सटीक निष्कर्ष यही है कि UN में ट्रंप ने अपना पुराना दावा दोहराया, जबकि भारत उस दावे को स्वीकार नहीं करता।