ईरान से समझौते के लिए ट्रंप की शर्त
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ समझौते के लिए आर्थिक रियायतों पर विचार करने को तैयार बताए जा रहे हैं। CNN की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन के एक अधिकारी ने कहा कि अंतिम समझौते के हिस्से के रूप में ईरान पर प्रतिबंधों में राहत और उसकी फ्रीज संपत्तियों को जारी करने की संभावना हो सकती है।
हालांकि, इसके लिए ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम पर ठोस प्रगति दिखानी होगी। अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, परमाणु मुद्दे पर सहमति के बिना कोई समझौता नहीं होगा।
परमाणु कार्यक्रम पर क्यों अड़ा है अमेरिका?
वॉशिंगटन की मुख्य मांग है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर स्पष्ट और सत्यापन योग्य प्रतिबद्धताएं दे। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि किसी भी समझौते में परमाणु मुद्दे को शामिल करना जरूरी है।
ट्रंप प्रशासन का रुख है कि आर्थिक राहत के बदले ईरान को ऐसे ठोस कदम उठाने होंगे जिनसे उसके परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिकी चिंताओं का समाधान हो सके।
ईरान की प्राथमिकता होर्मुज जलडमरूमध्य
ईरान की ओर से पेश हालिया प्रस्ताव में होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और संघर्षविराम की दिशा में तेजी से कदम उठाने की बात शामिल थी। इसके बदले तेहरान ने अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने, ईरानी संपत्तियां जारी करने और तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंधों में राहत की मांग रखी।
ईरान ने प्रस्ताव दिया था कि शर्तें पूरी होने पर वह सात दिनों के भीतर जलडमरूमध्य से समुद्री आवाजाही बहाल कर सकता है और परमाणु वार्ता दोबारा शुरू कर सकता है।
ट्रंप ने ईरान का ताजा प्रस्ताव किया था खारिज
ट्रंप ने 26 सितंबर को ईरान के ताजा प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया था। अमेरिकी पक्ष चाहता है कि होर्मुज और नाकेबंदी के मुद्दों के साथ-साथ परमाणु कार्यक्रम पर भी बातचीत हो। ईरान इसके विपरीत पहले समुद्री आवाजाही और आर्थिक प्रतिबंधों से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता दे रहा है।
प्रतिबंधों में राहत पर ट्रंप का बयान
29 सितंबर को ट्रंप ने ईरान को परमाणु रियायतों के बदले प्रतिबंधों में राहत या फ्रीज संपत्तियां जारी करने की पेशकश किए जाने से इनकार किया। वहीं, अमेरिकी अधिकारी ने CNN और Axios को बताया कि अंतिम समझौते में ऐसी रियायतें संभव हैं, यदि ईरान परमाणु मुद्दे पर ठोस कदम उठाता है। इससे संकेत मिलता है कि संभावित समझौते की शर्तों पर बातचीत जारी है, लेकिन कोई अंतिम सहमति नहीं बनी है।
मध्यस्थों के जरिए बातचीत जारी
अमेरिका और ईरान के अधिकारी कतर तथा अन्य मध्यस्थों के जरिए बातचीत कर रहे हैं। Reuters के अनुसार, 28 सितंबर को दोनों पक्षों ने मध्यस्थों से अलग-अलग बातचीत की। चर्चा में ईरान के सात-दिवसीय प्रस्ताव के संशोधित रूप पर विचार किए जाने की संभावना है।
समझौते की राह में क्या अड़चनें हैं?
दोनों देशों के बीच प्रमुख मतभेद इन मुद्दों पर बने हुए हैं:
- ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर प्रतिबद्धताएं और उनकी समय-सीमा।
- अमेरिकी प्रतिबंधों में राहत और फ्रीज संपत्तियों की रिहाई।
- ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकेबंदी।
- होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही।
- संघर्षविराम और उसके पालन की गारंटी।
निष्कर्ष:
ट्रंप प्रशासन की ओर से संभावित आर्थिक राहत का संकेत जरूर मिला है, लेकिन यह ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर ठोस कदमों से जुड़ा है। ईरान होर्मुज और नाकेबंदी को प्राथमिकता दे रहा है, जबकि अमेरिका परमाणु मुद्दे को समझौते का अनिवार्य हिस्सा मानता है। फिलहाल बातचीत जारी है और किसी अंतिम समझौते की घोषणा नहीं हुई है।