नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। करीब एक महीने बाद अमेरिका ने ईरानी ठिकाने पर सैन्य कार्रवाई की है। अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित लारक द्वीप पर ईरान के दो रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाया।

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ईरानी रॉकेट लॉन्चरों से होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री बारूदी सुरंगें (Sea Mines) पहुंचाने की तैयारी की जा रही थी। इसी खतरे को देखते हुए अमेरिकी सेना ने कार्रवाई की।


ईरान ने जॉर्डन में किया पलटवार

अमेरिकी हमले के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई की। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि उसने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाया।

जॉर्डन की सेना के मुताबिक, उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने आठ मिसाइलों को रोक लिया। ईरान की ओर से किए गए नुकसान के दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।


होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है अहम?

लारक द्वीप रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और यहां किसी भी सैन्य टकराव का असर तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पर पड़ सकता है।

अमेरिका का कहना है कि ईरानी सेना की गतिविधियों से इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते में जहाजों की आवाजाही को खतरा पैदा हो सकता था। इसी वजह से लॉन्चरों को निशाना बनाया गया।


एक महीने बाद फिर टूटा तनाव

यह हमला खास इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जुलाई के बाद अमेरिका की ओर से ईरान के खिलाफ यह पहली ज्ञात सैन्य कार्रवाई है। इससे दोनों देशों के बीच पहले से जारी तनाव के दोबारा बढ़ने की आशंका पैदा हो गई है।

ईरान ने अमेरिकी हमले को गंभीर कार्रवाई बताते हुए जवाब देने की चेतावनी दी थी और इसके बाद जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल हमला किया गया।


आगे बढ़ सकता है तनाव

अमेरिका और ईरान के बीच इस नए सैन्य टकराव से पूरे पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने की आशंका है। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि का असर क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है।

फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर है कि ईरान की जवाबी कार्रवाई के बाद अमेरिका अगला कदम क्या उठाता है और क्या दोनों देशों के बीच संघर्ष फिर व्यापक रूप लेता है।