नई दिल्ली: अमेरिका ने ईरान की आर्थिक गतिविधियों पर दबाव बढ़ाने के लिए 'Operation Economic Outcast' नाम से नया प्रतिबंध अभियान शुरू किया है। इस कार्रवाई में भारत की चार कंपनियों और तीन भारतीय नागरिकों को भी अमेरिकी प्रतिबंध सूची में शामिल किया गया है। अमेरिकी सरकार का कहना है कि इन कंपनियों ने ईरान के पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल कारोबार से जुड़े महत्वपूर्ण लेनदेन किए।

कौन-कौन सी 4 भारतीय कंपनियां शामिल हैं?

अमेरिकी कार्रवाई की चपेट में आने वाली कंपनियां हैं:

  1. Portease Partners LLP
  2. Sadashiva Overseas Ltd
  3. PP Softtech Pvt Ltd
  4. Prakrutees Infra Impex India Pvt Ltd

इनके अलावा तीन भारतीय नागरिकों—इंद्रिस्मिया अशरफमिया शेख, हरीश रामचंद्र रंगी और प्रशांत गर्ग—को भी प्रतिबंधित किया गया है।


Portease Partners पर क्या आरोप?

अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, Portease Partners भारत स्थित एक कस्टम्स ब्रोकर है। अमेरिका का आरोप है कि कंपनी ने ईरान से भारत में पेट्रोकेमिकल उत्पादों की कई खेपों के आयात को सुविधाजनक बनाया। कंपनी के दो पार्टनर इंद्रिस्मिया अशरफमिया शेख और हरीश रामचंद्र रंगी भी प्रतिबंधों की सूची में हैं।


Sadashiva Overseas पर सबसे बड़ा लेनदेन

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक Sadashiva Overseas ने ईरानी मूल के करीब 69 मिलियन डॉलर मूल्य के पेट्रोकेमिकल उत्पादों का आयात किया। अमेरिका का आरोप है कि कंपनी इन लेनदेन में ईरानी पक्षों के साथ कारोबार में शामिल थी।


PP Softtech पर क्या आरोप?

PP Softtech Pvt Ltd पर भी ईरान से पेट्रोकेमिकल उत्पादों की खरीद से जुड़े लेनदेन का आरोप है। अमेरिकी कार्रवाई में कंपनी के निदेशक प्रशांत गर्ग को भी नामित किया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक कंपनी से जुड़े लेनदेन का मूल्य करीब 25 मिलियन डॉलर बताया गया है।


Prakrutees Infra Impex भी सूची में

चौथी कंपनी Prakrutees Infra Impex India Pvt Ltd है। अमेरिकी आरोपों के मुताबिक इस कंपनी ने भी ईरान से करीब 25 मिलियन डॉलर मूल्य के पेट्रोकेमिकल उत्पादों से जुड़े लेनदेन किए।


अमेरिका ने क्यों लगाया प्रतिबंध?

अमेरिकी सरकार का कहना है कि संबंधित कंपनियां और व्यक्ति ईरान से पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल उत्पादों की खरीद, बिक्री, परिवहन या आयात से जुड़े महत्वपूर्ण लेनदेन में जानबूझकर शामिल थे। अमेरिका का उद्देश्य ईरान की तेल और ऊर्जा से होने वाली आय को कम करना है।


Operation Economic Outcast क्या है?

Operation Economic Outcast अमेरिका का ईरान के खिलाफ नया व्यापक आर्थिक दबाव अभियान है। इसका मकसद ईरान की वित्तीय और व्यापारिक लाइफलाइन को कमजोर करना और उसके तेल, शिपिंग, टेक्नोलॉजी, एविएशन, गोल्ड और डिजिटल एसेट्स से जुड़े नेटवर्क पर दबाव बढ़ाना है।


भारत पर क्या असर पड़ सकता है?

चार भारतीय कंपनियों पर कार्रवाई से भारत-ईरान व्यापार में काम करने वाली कंपनियों के लिए अमेरिकी प्रतिबंधों का जोखिम बढ़ सकता है। खास तौर पर वे कारोबारी और वित्तीय संस्थान सतर्क हो सकते हैं जिनका ईरान से पेट्रोलियम या पेट्रोकेमिकल व्यापार जुड़ा है।

हालांकि, इन कंपनियों पर अमेरिकी प्रतिबंध लगने का मतलब यह नहीं है कि भारत सरकार ने इन कंपनियों को प्रतिबंधित कर दिया है। यह अमेरिका की अपनी प्रतिबंध व्यवस्था के तहत की गई कार्रवाई है।


अमेरिका का बड़ा संदेश

इस कार्रवाई के जरिए वॉशिंगटन ने यह संकेत दिया है कि ईरान के साथ तेल और पेट्रोकेमिकल कारोबार करने वाली विदेशी कंपनियां भी अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में आ सकती हैं। अब नजर इस बात पर रहेगी कि भारत की ओर से इन कंपनियों और अमेरिकी कार्रवाई को लेकर क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया आती है।