नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच आर्थिक टकराव अब और गहरा गया है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने ईरान के खिलाफ नई कार्रवाई को बेहद व्यापक आर्थिक अभियान बताया है। अमेरिका ने ईरान के तेल, शिपिंग, वित्त, तकनीक, सोना, एविएशन और डिजिटल एसेट्स से जुड़े नेटवर्क पर कार्रवाई की है। करीब 60 संस्थाओं, व्यक्तियों और जहाजों को नई पाबंदियों में शामिल किया गया है।
भारत की 4 कंपनियां भी अमेरिकी कार्रवाई की जद में
इस बार अमेरिकी कार्रवाई का असर भारत तक पहुंच गया है। रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका ने चार भारत-आधारित कंपनियों और तीन भारतीय नागरिकों पर प्रतिबंध लगाए हैं। इनमें Portease Partners LLP, Sadashiva Overseas Ltd, PP Softtech Pvt Ltd और Prakrutees Infra Impex India Pvt Ltd शामिल हैं। अमेरिकी पक्ष के मुताबिक इनका संबंध ईरान से पेट्रोलियम और अन्य व्यापारिक गतिविधियों से रहा है।
भारत-ईरान व्यापार पर बढ़ेगा दबाव
अमेरिकी प्रतिबंधों के साथ-साथ UAE द्वारा ईरान के साथ व्यापार और वित्तीय लेनदेन रोकने से भारतीय कारोबारियों के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। भारत से ईरान को बड़ी मात्रा में चावल, चाय और दवाओं का निर्यात होता है और इनका भुगतान व व्यापारिक रूट काफी हद तक UAE के जरिए चलता रहा है।
2026 की पहली छमाही में भारत ने ईरान को करीब 383 मिलियन डॉलर का चावल और 14.34 मिलियन डॉलर की चाय निर्यात की थी। अगर मौजूदा व्यापारिक रुकावट लंबी चलती है तो खासकर बासमती चावल के निर्यातकों पर असर पड़ सकता है।
चाबहार पोर्ट को लेकर भी चिंता
भारत के लिए चाबहार पोर्ट रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। यह भारत को पाकिस्तान को बायपास करते हुए अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच का रास्ता देता है। नए अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण इस प्रोजेक्ट से जुड़ी भारतीय कंपनियों और वित्तीय लेनदेन पर अतिरिक्त दबाव की आशंका है।
ईरान से तेल खरीदना भी हो सकता है मुश्किल
भारत ने हाल के वर्षों में ईरान से तेल खरीद काफी कम कर दी है। फिर भी 2026 की पहली छमाही में भारत के ईरान से कच्चे तेल के आयात की कीमत करीब 707 मिलियन डॉलर रही। रिपोर्ट के मुताबिक ये आयात पहले मिले अमेरिकी अपवाद/छूट के तहत संभव हुए थे और नई पाबंदियों के बाद इन्हें जारी रखना मुश्किल हो सकता है।
आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
अगर ईरान के तेल निर्यात और होर्मुज के रास्ते पर लंबे समय तक दबाव बना रहता है, तो इसका असर वैश्विक तेल कीमतों और शिपिंग लागत पर पड़ सकता है। भारत के लिए महंगा कच्चा तेल पेट्रोल-डीजल, LPG, ट्रांसपोर्ट और कई आयातित उत्पादों की लागत बढ़ा सकता है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि भारत में तुरंत पेट्रोल-डीजल या अन्य वस्तुओं की कीमतें बढ़ जाएंगी। वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि तेल की वैश्विक कीमत, होर्मुज में शिपिंग और भारत के वैकल्पिक सप्लाई स्रोत किस तरह प्रभावित होते हैं।
अमेरिका का 'सेकेंडरी सैंक्शन' वाला दबाव
नई अमेरिकी नीति का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि सिर्फ ईरानी कंपनियां ही नहीं, बल्कि ईरान के साथ कारोबार करने वाले विदेशी कारोबारी और वित्तीय संस्थान भी अमेरिकी कार्रवाई की चपेट में आ सकते हैं। अमेरिका ने मनी लॉन्ड्रिंग और प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाली विदेशी संस्थाओं को अमेरिकी वित्तीय प्रणाली से काटने की चेतावनी दी है।
भारत के लिए चुनौती यही है कि उसे ईरान के साथ रणनीतिक हितों और अमेरिका के साथ आर्थिक संबंधों के बीच संतुलन बनाना होगा। फिलहाल सबसे ज्यादा नजर चाबहार पोर्ट, भारतीय निर्यातकों और ईरान से तेल आयात पर रहेगी।