इराक से अमेरिकी सैनिकों की वापसी पूरी
अमेरिकी सेना ने इराक में ISIS के खिलाफ चलाए जा रहे अपने सैन्य अभियान को समाप्त करते हुए वहां से सैनिकों और गठबंधन सैन्य उपकरणों की वापसी पूरी कर ली है। अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार, उत्तरी इराक के एरबिल एयर बेस से गठबंधन बलों की व्यवस्थित वापसी के साथ 12 साल का सैन्य अभियान समाप्त हो गया।
यह अभियान ऑपरेशन इनहेरेंट रिजॉल्व (Operation Inherent Resolve) के नाम से जाना जाता था। इसका उद्देश्य इराक और सीरिया में ISIS के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करना और उसके क्षेत्रीय नियंत्रण को समाप्त करना था।
ट्रंप बोले- 'नरक की महंगी यात्रा का अंत'
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इराक से सैनिकों की वापसी को अमेरिका के लिए महत्वपूर्ण दिन बताया। उन्होंने कहा कि यह वापसी उस लंबे और महंगे सैन्य अभियान का अंत है, जिसमें अमेरिका को शामिल करने वाले फैसलों पर उन्होंने सवाल उठाए।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में इसे “नरक की एक बहुत महंगी यात्रा का अंत” बताया। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका इराक से ऐसे समय लौट रहा है जब वहां अब ISIS का तथाकथित खलीफा शासन नहीं है।
2014 में शुरू हुआ था ISIS के खिलाफ अभियान
इराक में अमेरिकी नेतृत्व वाला ISIS-विरोधी सैन्य अभियान 2014 में शुरू हुआ था। उस समय आतंकी संगठन ISIS ने इराक के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया था और मोसुल समेत कई प्रमुख शहर उसके नियंत्रण में चले गए थे।
अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने इराकी सुरक्षा बलों को प्रशिक्षण, खुफिया सहायता और सैन्य समर्थन दिया। वर्षों की लड़ाई के बाद ISIS का इराक में संगठित क्षेत्रीय नियंत्रण समाप्त हुआ। अमेरिकी रक्षा विभाग ने वापसी को इस 12 साल के अभियान की समाप्ति बताया है।
क्या इराक से अमेरिका की हर तरह की मौजूदगी खत्म हो गई?
अमेरिकी नेतृत्व वाले गठबंधन का इराक में सैन्य मिशन समाप्त होना और अमेरिका-इराक के बीच सभी सुरक्षा संबंध खत्म होना अलग-अलग बातें हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, अब इराक की सुरक्षा की जिम्मेदारी मुख्य रूप से उसकी अपनी सेनाओं के नेतृत्व में होगी। अमेरिका के साथ संबंध अधिक सामान्य द्विपक्षीय सुरक्षा सहयोग, प्रशिक्षण और खुफिया समन्वय की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
इराक में खुशी के साथ सुरक्षा को लेकर चिंता भी
अमेरिकी सैनिकों की वापसी को इराक की संप्रभुता और स्वतंत्र सुरक्षा व्यवस्था की दिशा में कदम बताया गया है। हालांकि, कुछ अधिकारियों और सुरक्षा विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि अमेरिकी सैन्य और खुफिया सहायता कम होने से सुरक्षा संबंधी चुनौतियां बढ़ सकती हैं।
विशेष रूप से कुर्द क्षेत्र में अमेरिकी वायु रक्षा प्रणालियों की वापसी को लेकर चिंता जताई गई है। हाल के क्षेत्रीय संघर्षों के दौरान इस इलाके में ड्रोन और मिसाइल हमलों की घटनाएं भी सामने आई थीं।
विशेषज्ञों की चिंता यह भी है कि सुरक्षा में किसी तरह का खालीपन ईरान समर्थित सशस्त्र गुटों के प्रभाव या ISIS के बचे हुए नेटवर्क को फिर सक्रिय होने का अवसर दे सकता है। यह आशंका है, न कि ISIS की वापसी की पुष्टि।
अमेरिका के लिए लंबे युद्ध का एक अध्याय समाप्त
इराक से अमेरिकी सैनिकों की वापसी अमेरिका की दो दशक से अधिक लंबी सैन्य मौजूदगी के एक बड़े अध्याय का अंत है। 2003 में इराक पर अमेरिकी नेतृत्व वाले आक्रमण के बाद शुरू हुआ युद्ध और उसके बाद की सैन्य कार्रवाइयां इराक की राजनीति तथा सुरक्षा व्यवस्था को लंबे समय तक प्रभावित करती रहीं।
अब इराक के सामने अपनी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने और ISIS जैसे आतंकी संगठनों के अवशेषों से निपटने की जिम्मेदारी है।
निष्कर्ष:
इराक से अमेरिकी नेतृत्व वाले गठबंधन की वापसी के साथ ISIS के खिलाफ 12 साल का सैन्य अभियान समाप्त हो गया है। ट्रंप ने इसे “नरक की महंगी यात्रा” का अंत बताया। हालांकि, इराक की सुरक्षा चुनौतियां खत्म नहीं हुई हैं और अमेरिका के साथ प्रशिक्षण तथा अन्य सुरक्षा सहयोग जारी रहने की संभावना है।